आदिवासी युवकों से मारपीट और लूट के आरोप में धाराएं बढ़ाने की मांग आदिवासी समाज संगठनों ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर कथित हिन्दू संगठन के नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

बैतूल। ग्राम सिमोरी क्षेत्र के तीन आदिवासी किसानों के साथ कथित मारपीट, लूटपाट और जातिसूचक अपमान के मामले में आदिवासी समाज संगठनों ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर सभी आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने तथा प्रकरण में गंभीर धाराओं की बढ़ोतरी की मांग की है। ज्ञापन आदिवासी समाज संगठन के नेता जितेंद्र सिंह इवने, जयस नेता सोनू धुर्वे एवं मुन्नालाल वाड़ीवा के नेतृत्व में सौंपा गया।

ज्ञापन में सुगना धुर्वे, चौलू धुर्वे एवं टन्टू नवड़े ने बताया कि उन्होंने कृषि कार्य के लिए ग्राम खेड़ी निवासी रोशन राठौर से दो बैल खरीदे थे और उन्हें अपने गांव ले जा रहे थे। आरोप है कि खेड़ी के आगे परतवाड़ा रोड स्थित एक प्रतिष्ठान के सामने उन्हें कथित हिन्दू दल से जुड़े कुछ लोगों ने रोक लिया। आवेदकों का आरोप है कि बैलों की खरीदी संबंधी पर्ची और विक्रेता द्वारा पुष्टि किए जाने के बावजूद उनके साथ गाली-गलौज की गई तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई।
ज्ञापन के अनुसार कथित हिंदू संगठन के अंश तायवाडे नगर संयोजक,
ललित यादव प्रखण्ड गौ रक्षा प्रमुख, कुणाल पाटिल, राहुल जोशी, आकाश राठौर सहित अन्य लोगों पर लाठी, पाइप, लोहे की रॉड एवं अन्य वस्तुओं से हमला करने का आरोप लगाया गया है। आवेदकों का दावा है कि घटना में सुगना धुर्वे के हाथ में फ्रैक्चर हुआ, जबकि चौलू धुर्वे एवं टन्टू नवड़े को भी गंभीर चोटें आईं। साथ ही बैल विक्रेता के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उनके मोबाइल और नकदी छीन ली गई। बाद में मोबाइल वापस कर दिए गए, लेकिन चौलू धुर्वे के 4 हजार रुपये और सुगना धुर्वे के 5 हजार रुपये वापस नहीं किए गए। ज्ञापन में जान से मारने की धमकी देने तथा पानी मांगने पर अमानवीय व्यवहार किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित थाने लाया गया। आवेदकों का कहना है कि उनकी रिपोर्ट दर्ज की गई है, लेकिन घटना में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध नामजद कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने एसपी से लूट, गंभीर मारपीट, जान से मारने की धमकी तथा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं को जोड़ते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आवेदकों ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सकीय स्टाफ समय पर उपलब्ध नहीं था और बाद में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया, जांच का निष्कर्ष सामने आना शेष है।
